लॉकडाउन में चारा बिना बिलबिला रहे थे जानवर, आज इस इंतजाम से मिली थोड़ी राहत
कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लॉकडाउन के बीच गोरखपुर और आसपास के जिलों में पालतू पशु भूख से बिलबिला रहे थे। पशुपालकों के पास चारे की व्यवस्था लगभग खत्म हो चली थी। ऐसे में गोरखनाथ मंदिर स्थित सीएम कार्यालय के प्रभारी मोतीलाल सिंह ने 'हिन्दुस्तान' में छपी खबर का संज्ञान लिया तो उनके कहने पर शुक्रवार को प्रशासन ने व्यवस्था बनाई। आदेश हुआ कि अब चारा-भूसा लाने वाले वाहन नहीं रोके जाएंगे।1
इस इंतजाम की वजह से पशु और उन्हें पालने वालों ने थोड़ी राहत महसूस की है। शुक्रवार को पादरी बाजार क्षेत्र में चारा बिक्री हुई। पशुपालकों ने वहां आकर अपने पशुओं के लिए भूसा,चोकर और अन्य चारे की खरीदारी की। तारामंडल के राजू यादव ने बताया कि चार दिन से उनके पशु भूखे थे। शुक्रवार को पादरी बाजार क्षेत्र में भूसा बिक्री का पता चला तो यहां दौड़े चले आए। मोहनापुर की सावित्री गुप्ता ने 15 गायें पाल रखी हैं। लॉकडाउन के चलते उनके सामने भी जानवरों के चारे का संकट खड़ा हो गया है। शुक्रवार को चारा खरीदने के बाद उन्होंने कहा कि प्रशासन को इसकी पुख्ता व्यवस्था बनानी चाहिए। संगम चौराहा के पास रहने वाले उमाशंकर के पास तीन पशु हैं। उन्होंने 30 किलो भूसा खरीदा जो उनके मुताबिक अगले तीन दिन तक चलेगा। जाहिर है कि उमाशंकर चाहते हैं कि सरकार पशुचारे का कोई पुख्ता इंतजाम करे ताकि आने वाले दिनों में लॉकडाउन की वजह से उनके पशुओं को भूख का सामना न करना पड़े।
पशुआहार का भी संकट
पशुओं को भूसा किसी तरह उपलब्ध हो गया लेकिन पशु आहार का संकट खड़ा हो गया। प्रशासन ने सिर्फ किराना, दूध डेयरी और सब्जियों की दुकानें को खोलने की इजाजत दी थी। पशुआहार की दुकानें बंद थीं जिनकी वजह पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा था। इसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ रहा था।
सीएम ने किसानों को दी बड़ी राहत, लॉकडाउन में ये नहीं रुकेगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत देते हुए लॉकडाउन के दौरान भी खाद-बीज, कृषि रक्षा रसायनों की थोक और फुटकर दुकानें पहले की तरह खुली रहने की छूट दे दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने इस सम्बन्ध में सभी मंडलायुक्तों, डीएम, एसएसपी और एसपी को निर्देश जारी किये हैं। इस आदेश में कहा गया है कि खाद-बीज, कृषि रक्षा रसायनों की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहे। इसके लिए इनको बनाने वाली कंपनियों, लोडिंग एवं अनलोडिंग में लगे श्रमिकों और इनके परिवहन में लगे वाहन भी छूट के दायरे में आएंगे। इसी तरह की छूट कटाई में प्रयुक्त कंबाईन हार्वेस्टर और इस दौरान जरूरी श्रमिकों पर भी होगी।
इस साल फरवरी-मार्च के अप्रत्याशित मौसम की मार से यूं ही किसान परेशान हैं। मौजूदा समय में उनकी सरसों, आलू, मटर और चना की फसलें या तो खेत में हैं या खलिहान में। गेहूं की फसल भी तैयार होने को है। ऐसे में किसानों को ये चिंता थी कि लॉकडाउन की स्थिति में हम अपनी उपज को कैसे बाजार तक पहुँचा पायंगे। सरकार के इस फैसले से परंपरागत किसानों के साथ सब्जी बोने वाले किसानों को भी राहत मिली है।